हिब्रू व्याकरण
79 व्याकरण अवधारणाएँ खोजें — शुरुआती से उन्नत तक।
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A1 (30)
हिब्रू वर्णमाला (האלפבית העברי) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। 22 व्यंजन अक्षर दाएँ से बाएँ लिखे जाते हैं। पाँच अक्षरों के अंतिम रूप होते हैं (ך,ם,ן,ף,ץ)। स्वर निकूद चिह्नों से दिखाए जाते हैं या संदर्भ से समझे जाते हैं। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
व्यक्तिवाचक सर्वनाम (כינויי גוף) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। कर्ता सर्वनाम हैं: אני, אתה/את, הוא/היא, אנחנו, אתם/אתן, הם/הן। हिब्रू दूसरी और तीसरी पुरुष में पुल्लिंग/स्त्रीलिंग का भेद रखती है। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
संज्ञा लिंग (מין השמות) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। हिब्रू संज्ञाएँ पुल्लिंग या स्त्रीलिंग होती हैं। स्त्रीलिंग अक्सर -ה या -ת पर समाप्त होता है: ילד (लड़का), ילדה (लड़की), בית (घर), דלת (दरवाज़ा)। यह ए1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
बहुवचन निर्माण (ריבוי) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। पुल्लिंग बहुवचन प्रायः -ים से बनता है (ספר→ספרים)। स्त्रीलिंग बहुवचन अक्सर -ות से बनता है (מילה→מילות)। कुछ अपवाद भी होते हैं, जैसे שולחן→שולחנות। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
निश्चित उपपद (ה' הידיעה) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। निश्चित उपपद הַ- (ha-) संज्ञा से जुड़ता है: ספר (एक किताब) → הספר (वह किताब)। अगले व्यंजन के अनुसार इसमें ध्वन्यात्मक बदलाव हो सकते हैं। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
मूल-प्रणाली (शोरेश) (מערכת השורש) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। हिब्रू शब्द प्रायः तीन-अक्षरी मूलों (שורש) से बनते हैं। मूल ס-פ-ר: ספר (किताब), לספר (कहना/सुनाना), ספרייה (पुस्तकालय), סופר (लेखक)। यह ए1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
להיות (“होना”) (הפועל להיות) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। वर्तमान काल में “होना” अक्सर छोड़ दिया जाता है: אני סטודנט (“मैं विद्यार्थी हूँ”)। भूतकाल और भविष्यकाल में रूप स्पष्ट रूप से आते हैं: הייתי, אהיה। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
वर्तमान काल (पा'अल) (הווה - בניין פעל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। बुनियादी पा'अल क्रिया-पैटर्न में वर्तमान रूप लिंग और वचन से सामंजस्य करते हैं। כותב/כותבת/כותבים/כותבות (लिखना)। वर्तमान काल में पुरुष का भेद नहीं होता। यह ए1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
अस्तित्व (יש/אין) (יש ואין) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। יש का अर्थ “है/हैं” या “पास है” होता है, और אין का अर्थ “नहीं है/नहीं हैं” या “पास नहीं है” होता है। स्वामित्व दिखाने के लिए ל- उपसर्ग का प्रयोग होता है: יש לי (मेरे पास है)। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
विशेषण सामंजस्य (תארים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। विशेषण संज्ञा के बाद आते हैं और लिंग व वचन में उससे मेल खाते हैं: ילד גדול (बड़ा लड़का), ילדה גדולה (बड़ी लड़की)। निश्चित रूप में संज्ञा और विशेषण दोनों पर הַ- लगता है। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
निषेध (שלילה) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। क्रिया या विशेषण से पहले לא लगाकर निषेध बनता है। वर्तमान: אני לא כותב। भूतकाल: לא כתבתי। 'नहीं है/पास नहीं है' और नकारात्मक अस्तित्व के लिए אין प्रयोग होता है। यह ए1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
प्रश्न निर्माण (שאלות) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। हाँ/ना वाले प्रश्न स्वराघात या האם से बनते हैं। प्रश्नवाचक शब्द हैं: מה (क्या), מי (कौन), איפה (कहाँ), מתי (कब), איך (कैसे), למה (क्यों)। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
स्वत्व प्रत्यय (כינויי קניין) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। स्वत्व प्रत्यय संज्ञाओं से जुड़ते हैं: ספר+י=ספרי (मेरी किताब)। स्वतंत्र रूप भी मिलते हैं: שלי, שלך, שלו। आधुनिक हिब्रू में של- वाले रूप अधिक प्रचलित हैं। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
पूर्वसर्ग (מילות יחס) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। सामान्य पूर्वसर्ग हैं: ב- (में), ל- (को/के लिए), מ- (से), על (पर/के बारे में), עם (साथ), और את (प्रत्यक्ष कर्म चिह्न)। इनके साथ सर्वनाम प्रत्यय लग सकते हैं। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
संख्याएँ (מספרים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। 0-100 तक की संख्याओं के पुल्लिंग और स्त्रीलिंग रूप होते हैं। वे संज्ञा के लिंग से सामंजस्य करती हैं: שני ילדים (दो लड़के), שתי ילדות (दो लड़कियाँ)। यह ए1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
बुनियादी अभिव्यक्तियाँ और अभिवादन (ביטויים בסיסיים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। सामान्य वाक्यांश: שלום (नमस्ते/अलविदा), בוקר טוב (शुभ प्रभात), תודה (धन्यवाद), בבקשה (कृपया), סליחה (माफ़ करें)। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
सर्वनाम-प्रत्ययों वाले पूर्वसर्ग (מילות יחס עם כינויים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। पूर्वसर्ग सर्वनाम-प्रत्ययों के साथ रूप बदलते हैं: לי (मुझे/मेरे लिए), לך (तुम्हें), שלי (मेरा/मेरी), בו (उसमें), ממנו (उससे)। दैनिक बोलचाल के लिए ये आवश्यक हैं। यह ए1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
समय और स्थान के क्रियाविशेषण (תארי פועל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। Common adverbs: עכשיו (now), היום (today), אתמול (yesterday), מחר (tomorrow), פה/כאן (here), שם (there), תמיד (always). यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
बुनियादी समुच्चयबोधक (מילות חיבור בסיסיות) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। सामान्य समुच्चयबोधक: ו- (और), אבל (लेकिन), או (या), כי (क्योंकि), גם (भी), אז (तो/इसलिए)। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
संकेतवाचक सर्वनाम (כינויי רמיזה) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। इसमें זה/זאת/זו (यह, पुं./स्त्री.), אלה/אלו (ये), और ההוא/ההיא (वह) जैसे रूप शामिल होते हैं। ये लिंग और वचन के अनुसार मेल खाते हैं। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
Hebrew basic word order: SVO. Copula (to be) omitted in present. Definite direct objects marked with את.
समय और तारीख बताना (שעון ותאריכים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। इसमें समय पूछना और बताना, जैसे מה השעה? (“कितने बजे हैं?”), सप्ताह के दिन (יום ראשון–שבת), महीने, ऋतुएँ और हिब्रू कैलेंडर के संदर्भ शामिल हैं। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
मोडल अभिव्यक्तियाँ (רוצה, יכול, צריך) (ביטויי אופן) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। मोडल-जैसी अभिव्यक्तियाँ: רוצה (चाहना), יכול (सकना), צריך (ज़रूरत/चाहिए), אפשר (संभव/अनुमति)। ये लिंग और वचन के अनुसार सामंजस्य करती हैं और इनके बाद धातुरूप आता है। यह ए1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
अनियमित बहुवचन (ריבוי חריג) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। अप्रत्याशित बहुवचन अंत वाली संज्ञाएँ: שולחן→שולחנות (पुंलिंग→-ות), מילה→מילים (स्त्रीलिंग→-ים), עיר→ערים (स्वर परिवर्तन)। ये सामान्य अपवाद हैं। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
सामान्य अनियमित क्रियाएँ (Pa'al) (פעלים שכיחים לא רגילים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। इसमें अधिक प्रयुक्त अनियमित Pa'al क्रियाएँ शामिल हैं: הלך (चलना), בא (आना), נתן (देना), לקח (लेना), אכל (खाना), ישב (बैठना)। रूप-परिवर्तन के दौरान धातु में बदलाव आ सकते हैं। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
स्थान और दिशा व्यक्त करना (הבעת מיקום וכיוון) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। स्थान: ב- (में/पर), दिशा: ל- (की ओर), -ה (की तरफ़): הביתה (घर की ओर)। स्थिति: ליד (के पास), מול (सामने), בתוך (अंदर)। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
मात्रा व्यक्त करना (הבעת כמות) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। मात्रा सूचक शब्द: הרבה (बहुत), קצת (थोड़ा), מעט (कम), כמה (कुछ/कितना)। הרבה के साथ बहुवचन अनुबंध की आवश्यकता नहीं होती। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
रीति-वाचक क्रियाविशेषण (תארי אופן) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। रीति-वाचक क्रियाविशेषण: טוב (अच्छी तरह), מהר (तेज़ी से), לאט (धीरे), יפה (सुंदर ढंग से), קשה (कठिन परिश्रम से)। ये अक्सर विशेषण रूपों जैसे ही होते हैं। यह A1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
नामवाची वाक्य (बिना क्रिया) (משפט שמני) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। हिब्रू वर्तमान काल में 'होना' क्रिया को अक्सर छोड़ देता है: אני מורה (मैं शिक्षक हूँ)। इसमें कर्ता + विधेय बिना संयोजक क्रिया के आते हैं। जोर देने के लिए הוא/היא/זה प्रयोग हो सकते हैं। यह ए1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
של के साथ अधिकार (קניין עם של) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। של (का/की/के) अधिकार व्यक्त करता है: הספר של דני (डैनी की किताब)। बोलचाल की हिब्रू में यह निर्माण-समास से अधिक सामान्य है। यह सर्वनाम-प्रत्ययों के साथ भी जुड़ता है। यह ए1 (शुरुआती) स्तर का विषय है, इसलिए हम बहुत ही सरल और बुनियादी बातों से शुरू करेंगे।
A2 (12)
भूतकाल (पा'अल) (עבר - בניין פעל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। भूतकाल में मूल पर पुरुष/लिंग संबंधी प्रत्यय लगते हैं: כתבתי, כתבת, כתב, כתבה, כתבנו, כתבתם, כתבו। मूल व्यंजन बदल भी सकते हैं। यह ए2 (प्रारंभिक) स्तर का विषय है जो आपकी बुनियादी समझ को और मज़बूत करेगा।
भविष्य काल (Pa'al) (עתיד - בניין פעל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। इसका सामान्य ढाँचा है: उपसर्ग + धातु + प्रत्यय। उदाहरण के लिए: אכתוב, תכתוב, יכתוב, תכתוב, נכתוב, תכתבו, יכתבו। प्रमुख उपसर्ग हैं: א-, ת-, י-, נ-। यह A2 (प्रारंभिक) स्तर का विषय है जो आपकी बुनियादी समझ को और मज़बूत करेगा।
पिएल क्रिया-पैटर्न (בניין פיעל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। पिएल पैटर्न अक्सर तीव्र या कारक अर्थ देता है। מדבר (बोलता है), מלמד (पढ़ाता है), מבקש (माँगता है)। बीच का व्यंजन दोगुना माना जाता है। यह ए2 (प्रारंभिक) स्तर का विषय है जो आपकी बुनियादी समझ को और मज़बूत करेगा।
हिफ़ईल क्रिया-पैटर्न (בניין הפעיל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। हिफ़ईल पैटर्न प्रायः कारक अर्थ देता है। מכתיב (लिखवाता/निर्देशित करता है), מזמין (आमंत्रित करता/मँगवाता है), מתחיל (शुरू करता है)। आरंभिक ה- उपसर्ग इसकी विशेषता है। यह A2 (प्रारंभिक) स्तर का विषय है जो आपकी बुनियादी समझ को और मज़बूत करेगा।
सम्बद्ध अवस्था (स्मिखुत) (סמיכות) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। इसमें של के बिना संज्ञा-समास बनते हैं: בית ספר (स्कूल), חדר שינה (शयनकक्ष)। पहले शब्द का रूप अक्सर बदल जाता है। यह A2 (प्रारंभिक) स्तर का विषय है जो आपकी बुनियादी समझ को और मज़बूत करेगा।
तुलना (השוואה) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। तुलनात्मक रूप: יותר + विशेषण + מ- (से अधिक)। परमोत्कृष्ट रूप: ה- + विशेषण + ביותר (सबसे अधिक)। अनियमित उदाहरण: טוב→יותר טוב/הכי טוב। यह A2 (प्रारंभिक) स्तर का विषय है जो आपकी बुनियादी समझ को और मज़बूत करेगा।
कालसूचक संयोजक (מילות חיבור זמן) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। समयसूचक संयोजक: כש- (जब), אחרי ש- (बाद में), לפני ש- (पहले), בזמן ש- (जबकि), מאז ש- (से), עד ש- (जब तक)। यह A2 (प्रारंभिक) स्तर का विषय है जो आपकी बुनियादी समझ को और मज़बूत करेगा।
कर्म सर्वनाम (כינויי מושא) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। प्रत्यक्ष कर्म सर्वनाम हैं: אותי (मुझे), אותך (तुम्हें/आपको), אותו (उसे — पुल्लिंग), אותה (उसे — स्त्रीलिंग), אותנו (हमें), אותם/ן (उन्हें)। ये क्रिया के बाद आते हैं। यह A2 (प्रारंभिक) स्तर का विषय है जो आपकी बुनियादी समझ को और मज़बूत करेगा।
अनिश्चित सर्वनाम (כינויים בלתי מוגדרים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। अनिश्चित शब्द: מישהו (कोई व्यक्ति), משהו (कुछ), אף אחד (कोई नहीं), שום דבר (कुछ भी नहीं), כל (हर/सब), כמה (कुछ/कई)। यह A2 (प्रारंभिक) स्तर का विषय है जो आपकी बुनियादी समझ को और मज़बूत करेगा।
भूतकाल (पिएल और हिफ़इल) (עבר - פיעל והפעיל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। पिएल और हिफ़इल में भूतकाल पा'अल जैसे प्रत्यय-पैटर्न का पालन करता है, पर धातु-स्वर और उपसर्ग अलग होते हैं। यह ए2 (प्रारंभिक) स्तर का विषय है जो आपकी बुनियादी समझ को और मज़बूत करेगा।
जटिल समुच्चयबोधक (מילות חיבור מורכבות) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। मूल समुच्चयबोधकों से आगे: לכן (इसलिए), בנוסף (इसके अलावा), לא רק...אלא גם (केवल...नहीं बल्कि भी), בכל זאת (फिर भी)। यह A2 (प्रारंभिक) स्तर का विषय है जो आपकी बुनियादी समझ को और मज़बूत करेगा।
वर्तमान काल (पिएल और हिफ़इल) (הווה - פיעל והפעיל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। पिएल में वर्तमान रूप (מְ-ַ-ֵ-) जैसे מדבר/מדברת/מדברים/מדברות होते हैं। हिफ़इल में (מַ-ְ-ִי-) जैसे מתחיל/מתחילה। हर क्रिया के चार रूप होते हैं। यह ए2 (प्रारंभिक) स्तर का विषय है जो आपकी बुनियादी समझ को और मज़बूत करेगा।
B1 (13)
हित्पाएल क्रिया-पैटर्न (בניין התפעל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। हित्पाएल पैटर्न आत्मवाचक/परस्पर अर्थ देता है। מתלבש (कपड़े पहनता है), מתרחץ (स्वयं को धोता/नहाता है), מתכתב (पत्राचार करता है)। आरंभिक הת- उपसर्ग इसकी विशेषता है। यह B1 (मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपके भाषा कौशल को और गहरा करेगा।
निफ़अल क्रिया-पैटर्न (בניין נפעל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। निफ़अल पैटर्न प्रायः कर्मवाच्य या अवस्था-परिवर्तन बताता है। נכתב (लिखा जाता है), נשמע (सुनाई देता है), נפתח (खुलता है/खोला जाता है)। शुरुआत में נ- उपसर्ग लगता है। यह बी1 (मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपके भाषा कौशल को और गहरा करेगा।
Command forms: shortened future without prefix. כתוב! (write-m.sg), כתבי! (write-f.sg), כתבו! (write-pl). Negative: אל + future.
जटिल वाक्य (משפטים מורכבים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। आश्रित उपवाक्य ש- (कि/जो), כש- (जब), אם (यदि), למרות ש- (हालाँकि), בגלל ש- (क्योंकि) के साथ बनते हैं। यह B1 (मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपके भाषा कौशल को और गहरा करेगा।
Passive expressed through Nif'al and Pu'al patterns. Also analytical passive with auxiliary: הספר נכתב / הספר היה כתוב.
धातुरूप (שם הפועל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। धातुरूप (שם הפועל) ל- उपसर्ग से बनता है: לכתוב (लिखना), לדבר (बोलना)। प्रत्येक बिन्यान का अपना अलग धातुरूप पैटर्न होता है। यह B1 (मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपके भाषा कौशल को और गहरा करेगा।
भविष्य काल (सभी बिन्यानिम) (עתיד - כל הבניינים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। इसमें सातों बिन्यानिम में भविष्य काल का निर्माण शामिल होता है। हर बिन्यान एक ही उपसर्ग-समूह (א-, ת-, י-, נ-) का उपयोग करता है, लेकिन धातु-पैटर्न अलग-अलग होते हैं। यह B1 (मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपके भाषा कौशल को और गहरा करेगा।
संज्ञा पैटर्न (मिश्कालिम) (משקלים של שמות) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। इसमें धातुओं से पैटर्न (मिश्कालिम) के ज़रिये संज्ञाएँ बनती हैं: מִכְתָּב (पत्र), כּוֹתֵב (लेखक), כְּתִיבָה (लेखन)। यह B1 (मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपके भाषा कौशल को और गहरा करेगा।
परिमाणवाचक और तीव्रतासूचक शब्द (מילות ריבוי וצמצום) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। परिमाणवाचक शब्द: הרבה (बहुत), מעט (थोड़ा/कुछ), מספיק (पर्याप्त), רוב (अधिकांश), כמעט (लगभग)। इनकी स्थिति बदल सकती है। यह बी1 (मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपके भाषा कौशल को और गहरा करेगा।
क्रियावाचक संज्ञाएँ (שמות פעולה) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। क्रियावाचक संज्ञाएँ (שם פעולה) हर बिन्यान से बनती हैं, जैसे כתיבה (“लेखन”), דיבור (“बोलना/भाषण”), הכנה (“तैयारी”)। ये अमूर्त संज्ञाओं की तरह काम करती हैं। यह B1 (मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपके भाषा कौशल को और गहरा करेगा।
कारण और परिणाम व्यक्त करना (ביטוי סיבה ותוצאה) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। कारण: בגלל (के कारण), בשל (की वजह से), מפני ש- (क्योंकि)। परिणाम: לכן (इसलिए), כך ש- (ताकि/इस प्रकार कि), באופן ש- (इस तरह कि)। यह B1 (मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपके भाषा कौशल को और गहरा करेगा।
परासम्पूर्ण धातुरूप (इन्फिनिटिव कॉन्स्ट्रक्ट) (מקור מוחלט) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। ब-/ל-/כ- के साथ इन्फिनिटिव कॉन्स्ट्रक्ट समयसूचक उपवाक्यों में आता है: בבואי (जब मैं आता हूँ), בצאתו (जब वह निकला)। यह साहित्यिक है, लेकिन औपचारिक प्रसंगों में मिलता है। यह B1 (मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपके भाषा कौशल को और गहरा करेगा।
Ordinals: ראשון, שני, שלישי... (first, second, third). Date format: ב-1 בינואר. Formal dates use Hebrew calendar.
B2 (10)
पुअल और होफ़अल पैटर्न (בניין פועל והופעל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। पुअल पिएल का कर्मवाच्य है (מְסֻפָּר = बताया जाता है)। होफ़अल हिफ़इल का कर्मवाच्य है (מֻכְתָּב = लिखवाया/निर्देशित किया जाता है)। ये कम सामान्य लेकिन साहित्यिक हैं। यह बी2 (उच्च मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपको भाषा की सूक्ष्मताओं को समझने में मदद करेगा।
Real (אם + future), unreal present (אילו/לו + past, היה + present participle), unreal past (אילו/לו + past, היה + past).
परोक्ष कथन (דיבור עקיף) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। इसमें ש- उपवाक्यों के साथ कथित वाक्य बनाए जाते हैं। काल अक्सर बदल सकता है, जैसा अंग्रेज़ी में भी होता है। प्रश्नों को אם या प्रश्नवाचक शब्दों के साथ परोक्ष रूप में व्यक्त किया जाता है। यह B2 (उच्च मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपको भाषा की सूक्ष्मताओं को समझने में मदद करेगा।
कृदंत और क्रियात्मक विशेषण (בינוני פועל ותארי פועל) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। सक्रिय कृदंत (בינוני פועל) वर्तमान काल की तरह भी काम करता है। निष्क्रिय कृदंत (בינוני סביל) विशेषण की तरह आता है: כתוב (लिखा हुआ), סגור (बंद)। यह B2 (उच्च मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपको भाषा की सूक्ष्मताओं को समझने में मदद करेगा।
Cause and Purpose Clauses (משפטי סיבה ומטרה) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। कारण: בגלל ש- (क्योंकि), מכיוון ש- (चूँकि), הואיל ו- (जबकि)। उद्देश्य: כדי ש-/כדי ל- (ताकि/के लिए), על מנת ל- (इस उद्देश्य से कि)। यह B2 (उच्च मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपको भाषा की सूक्ष्मताओं को समझने में मदद करेगा।
स्वीकारोक्ति और विरोधी उपवाक्य (משפטי ויתור וניגוד) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। स्वीकारोक्ति के लिए למרות ש- (हालाँकि/इसके बावजूद), אף על פי ש- (यद्यपि), אע"פ ש- आते हैं। विरोध दिखाने के लिए בעוד ש- (जबकि), לעומת זאת (इसके विपरीत) आता है। यह B2 (उच्च मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपको भाषा की सूक्ष्मताओं को समझने में मदद करेगा।
Advanced relatives: ש- with resumptive pronouns, אשר (formal 'that/which'), מי ש- (whoever), מה ש- (whatever).
भूतकालीन प्रगतिशील और आदतन रूप (היה + בינוני) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। היה + वर्तमान कृदंत से भूतकालीन प्रगतिशील/आदतन अर्थ: הייתי כותב (मैं लिखा करता/करती था/थी / मैं लिख रहा/रही था/थी). शर्तों के साथ काल्पनिक/विपरीत-तथ्य अर्थ भी देता है। यह बी2 (उच्च मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपको भाषा की सूक्ष्मताओं को समझने में मदद करेगा।
जटिल सामंजस्य पैटर्न (הסכמה מורכבת) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। सामंजस्य की चुनौतियाँ: समूहवाचक संज्ञाएँ, मिश्रित-लिंग समूह (सामान्यतः पुंलिंग), 11-19 की संख्याएँ, और निर्जीव कर्ताओं के साथ स्त्रीलिंग क्रियाएँ। यह B2 (उच्च मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपको भाषा की सूक्ष्मताओं को समझने में मदद करेगा।
बिन्यानों में मूल-परिवर्तन (שינויי שורש בין בניינים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। एक ही मूल सातों बिन्यानों में अलग-अलग अर्थ कैसे बनाता है। मूल ש-מ-ר: שמר (रक्षा की), שימר (संरक्षित किया), השתמר (संरक्षित रहा)। यह बी2 (उच्च मध्यवर्ती) स्तर का विषय है जो आपको भाषा की सूक्ष्मताओं को समझने में मदद करेगा।
C1 (8)
उच्च रजिस्टर की हिब्रू (שפה גבוהה) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। साहित्यिक/औपचारिक हिब्रू: बाइबिलीय अभिव्यक्तियाँ, औपचारिक संबंध-रूप, काव्यात्मक शब्दावली और शास्त्रीय समुच्चयबोधक। यह C1 (उन्नत) स्तर का विषय है जो आपको भाषा पर अधिक नियंत्रण प्रदान करेगा।
जटिल क्रिया-पैटर्न (בניינים מורכבים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। सभी सात बिन्यान और उनकी परस्पर क्रियाएँ। चार-अक्षरी मूल (פרגן, טלפן)। संज्ञा से बने क्रिया-रूप (गूगल→לגגל)। यह C1 (उन्नत) स्तर का विषय है जो आपको भाषा पर अधिक नियंत्रण प्रदान करेगा।
आधुनिक प्रयोग में बाइबिलीय हिब्रू (מילים מהמקרא) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। दैनिक हिब्रू में बाइबिलीय अभिव्यक्तियाँ, क्रियारूप (ויהי, ויאמר) और स्थिर वाक्यांशों व साहित्य में सुरक्षित प्राचीन शब्दावली मिलती है। यह C1 (उन्नत) स्तर का विषय है जो आपको भाषा पर अधिक नियंत्रण प्रदान करेगा।
कानूनी और नौकरशाही भाषा (שפה משפטית) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। औपचारिक प्रशासनिक हिब्रू: कानूनी शब्दावली, आधिकारिक दस्तावेज़ और नौकरशाही वाक्य-विन्यास। संबंध-रूप और कर्मवाच्य का गहन उपयोग होता है। यह C1 (उन्नत) स्तर का विषय है जो आपको भाषा पर अधिक नियंत्रण प्रदान करेगा।
शैक्षणिक और पत्रकारिक रजिस्टर (רישום אקדמי ועיתונאי) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। इसमें जटिल वाक्यरचना, संज्ञाकरण, औपचारिक संयोजक और समाचारपत्रों व अकादमिक लेखन में प्रयुक्त विद्वत्तापूर्ण शब्दावली शामिल होती है। यह C1 (उन्नत) स्तर का विषय है जो आपको भाषा पर अधिक नियंत्रण प्रदान करेगा।
उन्नत शब्द-निर्माण (גזירת מילים מתקדמת) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। शब्द व्युत्पत्ति: उपसर्ग/प्रत्यय पैटर्न, ऋण शब्दों का एकीकरण, मिश्रित शब्द, संक्षिप्त रूप (ראשי תיבות)। हिब्रू नए शब्द कैसे बनाती है। यह C1 (उन्नत) स्तर का विषय है जो आपको भाषा पर अधिक नियंत्रण प्रदान करेगा।
काल-क्रम (רצף הזמנים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। यह जटिल वाक्यों में कालों के सामंजस्य से जुड़ा है। हिब्रू में अंग्रेज़ी की तुलना में अधिक लचीलापन होता है, लेकिन औपचारिक लेखन में, विशेषकर परोक्ष कथन में, काल-क्रम के नियमों का पालन किया जाता है। यह C1 (उन्नत) स्तर का विषय है जो आपको भाषा पर अधिक नियंत्रण प्रदान करेगा।
स्थिर सूत्र और सहप्रयोग (נוסחאות וצירופים קבועים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। औपचारिक और साहित्यिक हिब्रू में स्थिर अभिव्यक्तियाँ: नियत आरंभ और समापन वाक्यांश, सहप्रयोग, और ऐसे स्थिर वाक्यांश जिन्हें बदला नहीं जा सकता। यह C1 (उन्नत) स्तर का विषय है जो आपको भाषा पर अधिक नियंत्रण प्रदान करेगा।
C2 (6)
इज़राइली बोलचाल (סלנג ישראלי) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। बोलचाल की हिब्रू: अरबी से आए शब्द (יאללה, סבבה), सैन्य स्लैंग, युवाओं की भाषा और वार्तालाप-सूचक कण (כאילו, סתם)। यह C2 (निपुण) स्तर का विषय है जो आपको मूल वक्ताओं जैसी दक्षता की ओर ले जाएगा।
कहावतें और मुहावरे (פתגמים וניבים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। हिब्रू कहावतें और मुहावरे, जिनमें से कई बाइबिल और ताल्मुद से आए हैं: לתפוס שני ארנבות, לזרוק את התינוק עם המים। यह सी2 (निपुण) स्तर का विषय है जो आपको मूल वक्ताओं जैसी दक्षता की ओर ले जाएगा।
बोलचाल और लिखित हिब्रू (עברית מדוברת מול כתובה) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। इसमें बोलचाल और लिखित हिब्रू के व्यवस्थित अंतर शामिल हैं: उच्चारण में संक्षेप, व्याकरणिक सरलीकरण, रजिस्टरों का मिश्रण, और औपचारिक बनाम अनौपचारिक शब्दावली। यह C2 (निपुण) स्तर का विषय है जो आपको मूल वक्ताओं जैसी दक्षता की ओर ले जाएगा।
ताल्मूदी और रब्बी हिब्रू के प्रभाव (השפעות עברית תלמודית) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। इसमें आधुनिक प्रयोग में बचे रब्बी हिब्रू के गुण शामिल हैं: अरामी से आए शब्द, ताल्मूदी अभिव्यक्तियाँ, और दैनिक भाषा में बसे धार्मिक तथा सांस्कृतिक मुहावरे। यह C2 (निपुण) स्तर का विषय है जो आपको मूल वक्ताओं जैसी दक्षता की ओर ले जाएगा।
चिह्नित वाक्य-विन्यास और आलंकारिक संरचनाएँ (סגנון מוגשם ומבנים רטוריים) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। जोर देने के लिए असामान्य शब्द-क्रम, साहित्यिक संरचनाएँ, क्लेफ्ट वाक्य, एक्स्ट्रापोज़िशन और प्रवचन-स्तर की रणनीतियाँ। यह सी2 (निपुण) स्तर का विषय है जो आपको मूल वक्ताओं जैसी दक्षता की ओर ले जाएगा।
हिब्रू की जातीय और क्षेत्रीय किस्में (עברית עדתית ואזורית) हिब्रू भाषा में एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक अवधारणा है। इज़राइली समुदायों में उच्चारण और शब्दावली के अंतर: मिज़राही, अश्केनाज़ी, इथियोपियाई और रूसी-प्रभावित हिब्रू। यह समाजभाषिक जागरूकता से जुड़ा विषय है। यह C2 (निपुण) स्तर का विषय है जो आपको मूल वक्ताओं जैसी दक्षता की ओर ले जाएगा।
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